कोरबा। कोरबा जिले के करतला तहसील के ग्राम रामपुर में शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे और प्लॉटों की बिक्री का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि निजी जमीन के खसरा नंबर की आड़ में शासकीय भूमि को निजी बताकर प्लॉटों की बिक्री की गई और खरीदारों को सरकारी जमीन पर कब्जा भी सौंप दिया गया। मामले में अब तहसीलदार न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए राजस्व जांच के निर्देश दिए हैं।
मामला ग्राम रामपुर स्थित खसरा नंबर 750/1 की लगभग 48.469 हेक्टेयर शासकीय भूमि और खसरा नंबर 53/4 की 3 एकड़ निजी भूमि से जुड़ा है। आवेदक मोहम्मद इब्राहिम फारुकी, पिता मोहम्मद वसीम फारुकी, ने तहसीलदार करतला के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर गंभीर आरोप लगाए हैं।
आवेदन के मुताबिक, प्रथम अनावेदक अवध बिहारी दीक्षित, पिता नारायण प्रसाद दीक्षित पर आरोप है कि उन्होंने निजी भूमि खसरा नंबर 53/4 का हवाला देकर शासकीय भूमि खसरा नंबर 750/1 को निजी बताने का प्रयास किया। आरोप है कि प्लॉट क्रमांक 02 से 13 तक अलग-अलग तिथियों में अन्य लोगों को विक्रय विलेख के माध्यम से बेचे गए और खरीदारों को शासकीय भूमि पर कब्जा सौंप दिया गया। इसके बाद उक्त भूमि पर तेजी से मकान निर्माण किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।
आवेदक का कहना है कि दोनों खसरा नंबरों की भूमि के बीच लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी है। इसके बावजूद शासकीय भूमि को निजी बताकर बिक्री किए जाने का आरोप लगाया गया है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है तो राजस्व अभिलेखों और भूमि विक्रय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
तहसीलदार न्यायालय ने जारी किया नोटिस
इस मामले में तहसीलदार करतला के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 2026/1005/100007/7/1 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। 23 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत आवेदन के बाद न्यायालय ने प्रकरण दर्ज कर अनावेदक पक्ष को नोटिस जारी करने तथा राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी से स्पष्ट जांच प्रतिवेदन प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 13 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
अब जांच पर टिकी निगाहें
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासकीय भूमि पर कथित कब्जे और प्लॉट बिक्री के पीछे वास्तविकता क्या है? क्या संबंधित रजिस्ट्रियों में दर्शाए गए खसरा नंबर और मौके की जमीन एक ही हैं? क्या राजस्व विभाग सीमांकन कर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई करेगा? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच रिपोर्ट से ही सामने आएगा।
मामले में अनावेदक पक्ष का जवाब और राजस्व विभाग की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।



